Delhi :- झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं और धांधली का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
CBI जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत के सामने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी लगातार विरोध कर रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
याचिका में JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने के साथ-साथ पूरे मामले की CBI जांच या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संकेत दिया कि कथित परीक्षा अनियमितताओं की सच्चाई सामने लाने के लिए सामान्य जांच के साथ फोरेंसिक और तकनीकी जांच की जरूरत पड़ सकती है।
अदालत ने यह भी जानना चाहा कि विवाद सिर्फ JPSC की एक परीक्षा तक सीमित है या झारखंड में आयोजित दूसरी प्रतियोगी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में आती हैं। याचिकाकर्ता की ओर से JPSC के साथ-साथ JSSC की परीक्षाओं से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CBI जांच का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने झारखंड सरकार से जवाब मांगा है और सरकार का पक्ष सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
अब सभी की नजर झारखंड सरकार के जवाब और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। वहीं, JPSC अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच से परीक्षा विवाद की सच्चाई सामने आएगी।
Edited By :- Shashi Kumar, Prime Time News Desk.











