Edited By :- Shashi Kumar, Prime Time News Desk.
गोआसोल, मसालिया (दुमका) :- कृषि की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि खेतों और किसानों के बीच जाकर वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ तिलका मांझी कृषि महाविद्यालय (TMAC), बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) एवं सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (PRA) कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रामीण कृषि व्यवस्था, किसानों की समस्याओं और खेती-किसानी की जमीनी चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया और किसानों से सीधे संवाद कर उनकी कृषि पद्धतियों, समस्याओं तथा उपलब्ध ग्रामीण संसाधनों का अध्ययन किया।
खेतों में पहुंचकर सीखा खेती का व्यावहारिक ज्ञान
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों ने फसल उत्पादन, मृदा उर्वरता प्रबंधन, कटाई के बाद फसलों के नुकसान और कृषि से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों का अध्ययन किया। किसानों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा और उनके समाधान के लिए उपयोगी सुझाव भी प्रस्तुत किए।
इस दौरान विद्यार्थियों ने महसूस किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर प्रबंधन की जानकारी देना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
शिक्षकों ने किया विद्यार्थियों के कार्यों का मूल्यांकन
कार्यक्रम में दीपशिखा कुमारी, अंशु कुमार, राखी महतो, अर्चना एक्का एवं नेहा मिंज सहित अन्य विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
वहीं, कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के क्षेत्रीय कार्यों और गतिविधियों का मूल्यांकन डॉ. अभिजीत सत्पथी, डॉ. उपाली एवं डॉ. सरवन द्वारा किया गया। मूल्यांकन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए अध्ययन, किसानों के साथ संवाद, व्यावहारिक ज्ञान और समस्या समाधान के प्रयासों का आकलन किया गया।
किसानों के प्रति संवेदनशीलता और समस्या समाधान की क्षमता का विकास.
रावे एवं पीआरए कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कृषि शिक्षा को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर मिला। इससे विद्यार्थियों में किसानों के प्रति संवेदनशीलता, संवाद कौशल और कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित हुई।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अनुभव साबित हुआ। इसके माध्यम से उन्होंने ग्रामीण विकास, आधुनिक कृषि तकनीकों और किसान कल्याण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझा।
कुल मिलाकर, तिलका मांझी कृषि महाविद्यालय का यह प्रयास विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ जमीनी अनुभव प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ। ऐसे कार्यक्रमों से भविष्य के कृषि विशेषज्ञों को किसानों की जरूरतों को समझने और कृषि क्षेत्र के विकास में प्रभावी योगदान देने की प्रेरणा मिलती है।
प्राइम टाइम न्यूज़ | दुमका, झारखंड।











