Jamtara :- जामताड़ा के शाहनवाज आलम के मार्गदर्शन में जेईई एडवांस्ड 2026 में 50 में से 46 विद्यार्थियों ने हासिल की सफलता,किसान परिवार से निकलकर बने अकादमिक ऑपरेशंस मैनेजर, अब देशभर के नवोदय विद्यार्थियों को दिखा रहे आईआईटी का रास्ता.
Edited By :- Shashi Kumar, Prime Time News Desk.

झारखंड के जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर देशभर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने वाले मोहम्मद शाहनवाज आलम आज युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण के बल पर उन्होंने न केवल खुद सफलता हासिल की, बल्कि अब देश के विभिन्न राज्यों से आए नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों को आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में शाहनवाज आलम राजस्थान के बूंदी जिले स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में संचालित विशेष आईआईटी कोचिंग कार्यक्रम में अकादमिक ऑपरेशंस मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। यह संस्थान देश के चुनिंदा उत्कृष्ट केंद्रों में शामिल है, जहां विभिन्न राज्यों से चयनित मेधावी नवोदय विद्यार्थी इंजीनियरिंग और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। इस वर्ष संस्थान ने शानदार सफलता हासिल करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के 50 विद्यार्थियों में से 46 विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस्ड 2026 में सफलता प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस उपलब्धि के पीछे विद्यार्थियों की मेहनत के साथ-साथ शाहनवाज आलम की शैक्षणिक रणनीति, अकादमिक प्रबंधन और नियमित प्रदर्शन मूल्यांकन की भी अहम भूमिका मानी जा रही है।
खुद नवोदय के छात्र रहे, अब बन रहे हजारों विद्यार्थियों की प्रेरणा
शाहनवाज आलम की सफलता की कहानी इसलिए भी विशेष है क्योंकि वे स्वयं जवाहर नवोदय विद्यालय, जामताड़ा के पूर्व छात्र रहे हैं। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े शाहनवाज ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। उनके पिता खेती-किसानी के साथ-साथ आटा चक्की का संचालन कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद शाहनवाज ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। शिक्षा के प्रति समर्पण और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और आज देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
विद्यार्थियों की सफलता के पीछे निभा रहे अहम भूमिका
शाहनवाज आलम वर्तमान में लगभग 50 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की नियमित निगरानी करते हैं। वे टेस्ट विश्लेषण, अकादमिक योजना निर्माण, शिक्षकों के साथ समन्वय और विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान कर उनकी तैयारी को नई दिशा देते हैं। उनकी कार्यशैली का ही परिणाम है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं।शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ वे विद्यार्थियों की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें सुधारने की रणनीति भी तैयार करते हैं। इससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन करने में सफल होते हैं।
गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत है अवसर और मार्गदर्शन की
शाहनवाज आलम का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित अवसर की है। उनका कहना है कि यदि गांवों के बच्चों को बेहतर मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे भी देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुंच सकते हैं।उन्होंने कहा, “मैं स्वयं नारायणपुर जैसे छोटे से गांव से निकलकर यहां तक पहुंचा हूं। मैंने करीब से देखा है कि गांवों में कितनी प्रतिभाएं मौजूद हैं। जरूरत केवल उन्हें सही मंच और मार्गदर्शन देने की है। यदि सरकार और समाज मिलकर बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराएं तो झारखंड के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना सकते हैं।”
झारखंड के युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
आज शाहनवाज आलम केवल एक शिक्षा प्रबंधक नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के सपनों को आकार देने वाले मार्गदर्शक बन चुके हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण के बल पर कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। नारायणपुर के इस युवा की उपलब्धि पूरे जामताड़ा और झारखंड के लिए गर्व का विषय है। शाहनवाज आलम की यात्रा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि छोटे गांवों से निकलने वाले युवा भी देश के शैक्षणिक परिदृश्य में बड़ा योगदान दे सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
Edited By :- MD. Rafique Ansari, Prime Time News, Jamtara.











